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तो क्या टूटी बैसाखियों पर दौड़ रहा विकलांग स्वास्थ विभाग

तो क्या टूटी बैसाखियों पर दौड़ रहा विकलांग स्वास्थ विभाग



मरीजों की रक्षा करने वाली 108 में ही नहीं ऑक्सीजन और मेंटेनेंस



मरीज ही नहीं चालक भी हो रहे परेशान



मरीजों ने भाजपा पर निकाली भड़ास


बरेली।         देश के प्रधानमंत्री या फिर प्रदेश के मुख्यमंत्री जितने भी प्रयास कर ले परंतु नीचे स्तर के लोग लगातार चल रहे अभियानों को पलीता लगा रहे हैं जिसमें ऐसा लगता है कि विकलांग स्वास्थ्य विभाग खुद टूटी हुई वैसाखीयों पर दौड़ रहा है। जिससे रूट मरीजों ने अपना सारा गुस्सा भाजपा पर उतार दिया। रविवार देर रात तीन मामले जिला अस्पताल में आए वह तीनों ही एक से बढ़कर एक थे पैरा मामला सरकारी 108 एंबुलेंस नंबर यूपी 41 जी 2932 का है इस एंबुलेंस का चालक पूरन सिंह मीरगंज से भूरे नाम के व्यक्ति के घर से एक 40 वर्षीय महिला को लेकर आया था जिनको सांस की बीमारी थी परिजन भूरे के मुताबिक इज्जत नगर के पास एंबुलेंस के टायर की रबड़ उतर गई परंतु एंबुलेंस में स्टेपनी ही नहीं थी। एंबुलेंस का चालक पूरन सिंह इज्जत नगर से जिला अस्पताल तक फटे हुए टायर से एंबुलेंस लेकर पहुंचा परंतु जिला अस्पताल से मरीज को 300 बेड के लिए रेफर किया गया जहां पर एंबुलेंस नहीं जा सकती थी जिसके लिए चालक को दूसरी गाड़ी बुलानी पड़ी चालक के मुताबिक हर गाड़ी को 50 हजार किलोमीटर चलने के बाद नए टायर मिलते हैं परंतु उस गाड़ी को 51 हजार चलने के बाद भी डर नहीं मिले। वहीं एक एंबुलेंस संख्या यूपी 32 बीजी 8614 थाना इज्जत नगर के बांके की छावनी से अरविंद कुमार मौर्य की 40 वर्षीय मां को लेकर जिला अस्पताल पहुंचा वहीं अरविंद ने आरोप लगाया है कि पहले तो एक घंटा इंतजार करने के बाद एंबुलेंस वहां पहुंची परंतु एंबुलेंस के चालक ने बताया की गाड़ी में ऑक्सीजन नहीं है ऐसे में सरकारी गाड़ी मंगाने का फायदा ही क्या हुआ इससे अच्छा तो जो एक घंटा इंतजार किया था इतनी देर में किसी की भी टुकटुक पर अपने मरीज को लेकर अस्पताल पहुंच जाते। एक एम्बुलेंस में एक गम्भीर मरीज जोर से सांसे लेने के साथ हाथ का पंखा करता नजर आया। ऐसे में आखिर जिम्मेदार किसको माना जाए क्योंकि सरकार जब भी ऐसी योजनाएं लागू करती है तब चालक की सैलरी से लेकर गाड़ी के मेंटेनेंस तक का खर्चा समय से सुनिश्चित करती है परंतु बीच में बैठे कमीशन खोर सारी सुविधाओं को तहस-नहस कर देते हैं जिससे सरकार द्वारा दी गई सुविधाएं जनता तक नहीं पहुंच पाती।

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