विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस पर विदेश
विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस पर विदेश
विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस प्रत्येक वर्ष 28 जुलाई को मनाया जाता है। विश्व में प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन से किसी स्थान पर सूखा पड़ रहा है तो किसी स्थान पर बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। प्राकृतिक संसाधन जैसे पेड़ की कटाई, खनन के कारण होने वाले जंगलों की कटाई, कारखाने लगाने के लिए बड़े पैमाने पर जंगलों और वनों को कटा जा रहा है। इसी को देखते हुए प्रत्येक वर्ष 28 जुलाई को विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस (World Nature Conservation Day 2021)मनाया जाता है। इसको मनाने का उद्देश्य लोगों को इसके प्रति जागरूक करना है। एक स्वस्थ समाज होने के लिए पर्यावरण का होना जरूरी है। पर्यावरण हमारी पृथ्वी को संतुलित बनाये है। जंगलों में जंगली जानवर, कई तरह के जड़ी-बुटी तथा आदि मानव का निवास स्थान होता है। किन्तु कुछ लोग अपने लाभ के लिए वनों और जंगलों को काट देते है। लेकिन उन्हें इस बात की कोई चिन्ता नहीं होती है कि ये जंगली जानवर कहां जाये। पर्यावरण दो शब्दों से मिलकर बना है, परि + आवरण । परि का अर्थ होता है चारों ओर तथा आवरण का अर्थ घेरे हुए अर्थात पर्यावरण क अर्थ है चारों ओर से घेरे हुए। पर्यावरण का आशय जैविक तथा अजैविक घटकों एवं उनके आस-पास के वातावरण के सम्मिलित रूप से है जो पृथ्वी पर जीवन के आधार को संभव बनाता है। इसके अंतर्गत मानव जनित पर्यावरण, यथा- सामाजिक एवं सांस्कृतिक वातावरण को सम्मिलित किया जाता है। पर्यावरण के चार तत्व हैः-
• सथलमंडल (Lithosphere)
• जलमंडल (Hydrosphere)
• वायुमंडल (Atmosphere)
• जैवमंडल (Biosphere)
प्रकृति संरक्षण का इतिहास
1992 में रियो डि जेनेरियो (ब्राजील) में आयोजित पृथ्वी सम्मेलन में प्रकृति संरक्षण की बात की गयी। इस सम्मेलन में जैव-विविधता की मानक परिभाषा अपनाई गई।
जैव-विविधता समस्त स्रोतों, यथा- अंतर्क्षेत्रीय, स्थलीय, सागरीय एवं अन्य जलीय पारिस्थितिकी तंत्रों को सुरक्षित रखना। विश्व में ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण बढ़ता तापमान भी पर्यावरण के लिए काफी उत्तरदायी है। ग्लोबल वॉर्मिंग से समुद्र में स्थित कई द्वीप व द्वीपीय देश डुबने के कगार पर है।
इसी को देखते हुए 1992 में ब्राजील के रियो डि जेनेरियो में सम्मेलन आयोजित हुआ जिसमें 174 देशों ने भाग लिया। 2002 में जोहान्सबर्ग में पृथ्वी सम्मेलन आयोजित कर विश्व के सभी देशों को पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान देने के लिए कई उपाय सुझाए गए। और तापमान को 1.5 तक लाने का प्रयास है।
हम सभी प्रकृति के बीच रहते हैं प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करते हैं तो इसे सुरक्षित रखना भी हम सभी की जिम्मेदारी है !आओ हम सब संकल्प लें हम अपने पर्यावरण की सुरक्षा में अपना पूर्ण सहयोग देंगे और निम्नलिखित बातों को ना सिर्फ अपनाएंगे बल्कि लोगों को भी के लिए जागरूक करेंगे
• जंगलों को मत काटो। ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाये।
• जरूरत पड़ने पर ही जमीन में उपलब्ध पानी का इस्तेमाल करें।
• कार्बन जैसी नशीला गैसों का उत्पादन कम करें।
• उपयोग किए गए पानी का पुर्नचक्रीकरण हो। पानी की जरूर हो तभी उपयोग करें।
• भू जल को वापस स्तर पर लाने के लिए वर्षा जल संचयन की व्यवस्था करें। तालाब और गड्डे का निर्माण करें।
• ध्वनि प्रदूषण को सीमित करें। तथा सड़कों के किनारे पेड़ लगाये।
• प्लास्टिक लिफाफों का प्रयोग न करें और रद्दी कागज के लिफाफों या कपड़े के थैलों का उपयोग करें।
• अगर कमरे में कोई न हो उस कमरे का पंखा और लाइट बंद कर दें।
• पानी को बेवजह बर्बाद न करें। यदि किसी पम्प, नल या टोंटी से पानी गिर रहा हो तो उसे बन्द कर दे।
• इंटरनेट युग में, यदि हम अपने सभी बिलों का भुगतान ऑनलाइन करते हैं तो इससे न केवल हमारा समय बल्कि कागज के साथ-साथ पेट्रोल – डीजल की भी बचत होगी।
• अधिक पैदल चलें और अधिक साइकिल चलाएं। जिससे स्वास्थ्य भी ठीक रहे।
• ऐसी तकनीकों का प्रयोग करें जिनका प्रकृति से सकारात्मक संबंध हो। जैसे (i) जैविक खाद का प्रयोग (ii) डिब्बा बंद सामग्री का कम प्रयोग।
• जलवायु-सुधार प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देना।
• पहाड़ को खत्म करने की साजिशों का विरोध करें। प्रकृति वस्तुओं का प्रयोग करें।