दाह संस्कार के लिए चिता बदलने को लेकर हुई मारपीट
सूचना मिलते ही मौके पर पहुँची पुलिस

दो बझे तक आ चुके थे 19 शव
मंगलवार को सभी दाह संस्कार हुए जमीन पर

अब शव जलाने को नहीं मिल रही चिताएँ
बरेली। कोविड-19 की दहशत से लगातार मौतों का सिलसिला भी बढ़ता जा रहा है जिसके चलते अब शव जलाने के लिए चिताएँ कम पड़ रही है। मंगलवार प्रात लगभग 11:30 बजे सिटी शमशान भूमि पर 2 मृतकों के परिजनों में आपसी मारपीट हो गई कारण था अपने अपने मृतकों के शव दाह संस्कार करने के लिए चुनिंदा जगह का। श्मशान भूमि के पंडित त्रिलोकीनाथ ने बताया की सोमवार को 32 शव दाह संस्कार के लिए आए थे क्योंकि श्मशान भूमि में 33 चिताएँ हैं इसलिए सब भरी हुई थी जिसके चलते मंगलवार को जमीन पर ही दाह संस्कार किए गए जानकारी के मुताबिक मंगलवार दोपहर 2:00 बजे तक 19 शव आ चुके थे। जबकि अभी दिन बाकी था। श्मशान भूमि के सेवक कन्हैया लाल ने बताया की 17 नंबर पर कालीबाड़ी में रहने वाले मर्तक बाबूराम के नाम से कौशल ने बुक करा रखा था जिस पर मठ लक्ष्मीपुर के रहने वाले मृतक विकास जोहरी के परिजनों ने विकास केशव का दाह संस्कार कर दिया। जिसके बाद जब कालीबाड़ी के लोग बाबूराम का शव लेकर शमशाद पहुंचे तो वह 22 नंबर पर बाबूराम का दाह संस्कार करने लगे जबकि वह सानिया मैं रहने वाले किसी मृतक के लिए बुक था बाबूराम के परिजनों का कहना था कि जब हमारी बुक की हुई जगह पर दूसरे ने दाह संस्कार कर दिया तो हम भी दूसरी जगह पर ही करेंगे इसी बात को लेकर दोनों मृतकों के परिजनों में बात इतनी बढ़ गई की आपस में लाठियां चलने की नौबत आ गई सूचना मिलते ही मौके पर मणिनाथ चौकी इंचार्ज प्रदीप कुमार भी पहुंच गए जहां समझा-बुझाकर मामला शांत किया गया।