काश को पर्यावरण दिवस पर कोई यह सोच लेता
काश को पर्यावरण दिवस पर कोई यह सोच लेता

बरेली। जहां एक तरफ पर्यावरण दिवस पर कई लोगों ने नए पौधे लगाकर खुशी जताई को तो कुछ लोगों ने ऐसे ही वृक्षों के साथ फोटो खिंचवा कर पर्यावरण दिवस का संदेश दिया परंतु यह सोचने की बात है कि हर वर्ष लाखों पेड़ लगाए जाते हैं जो पालन पोषण ना मिलने की वजह से नष्ट हो जाते हैं किसी बच्चे को जन्म देना और उसकी हिफाजत ना करना शायद यह सबसे बड़ा पाप है असली मानवता तब दिखती है जब किसी अनाथ हाथ पकड़ कर उसके जीवन को खुशहाल बनाया जाए ऐसे ही अगर हम सच में पर्यावरण दिवस मनाना चाहते हैं तो किसी बी पौधे को अपना बच्चा समझ कर पालना शुरू कर दो जिससे वह पौधे से वृक्ष बन कर लोगों को ऑक्सीजन ताजी हवा के साथ हरियाली बना कर खुशियां बांट सकें एक ऐसा ही संदेश रानी अवंती बाई कन्या महाविद्यालय की चित्रकार एवं प्रवक्ता डॉ अनु महाजन ने अपनी पेंटिंग में एक कटे हुए वृक्ष का दर्द बयां किया है शायद उन्होंने इसलिए दर्शाया है कि इस तरह से 1 वृक्ष लोगों को ऑक्सीजन के माध्यम से जीवन प्रदान करता है परंतु उसके जीवन को लोग बढ़ती आबादी एवं आज के समाज को देखते नष्ट करते जा रहे हैं शायद पर्यावरण दिवस पर इससे बड़ा संदेश नहीं हो सकता।