बच्चों के विवाद मे बड़े आमने-सामने चले ईंटे और पत्थर
बच्चों के विवाद मे बड़े आमने-सामने चले ईंटे और पत्थर
अक्सर छोटे विवाद यहाँ पकड़ लेते हैं तूल
2012 में पूर्व जिला अधिकारी पर भी हो चुका है यहाँ हमला
आखिर घटनाओं को कियूं छुपाना चाहते हैं दरोगा
बारादरी का पनबडिय़ा क्षेत्र अतिसंवेदनशील क्षेत्र में आता है। जहां देर रात बच्चों की लड़ाई केबाद दो समुदाय केलोग आमने-सामने आ गए। दोनों पक्षों ने बवाल के बाद एक दूसरे पर जमकर कर पथराव किया। सूचना पर देर रात सीओ तृतीय समेत बारादरी पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस को देखकर उपद्रवी फरार हो गए। तनाव पूर्ण शांति को देखते हुए मौके पर पुलिस फोर्स तैनात कर दिया गया है। पुलिस ने एक घायल युवक की ओर से मामला दर्ज करने केबाद उसका मेडिकल कराकर कार्रवाई शुरु कर दी। इंस्पेक्टर बारादरी नीरज मलिक ने बताया कि आरोपियों को तलाश किया जा रहा है। जल्द ही उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा।
बारादरी थाना क्षेत्र के पनबडिय़ा में मंगलवार की रात लाइट जाने केबाद लोग अपने-अपने घरों के बाहर बैठे हुए थे। इसी बीच किसी बात को लेकर बच्चों-बच्चों में विवाद हो गया। विवाद को सुलझाने के लिए वहीं के रहने वाले गुड्डïु का बेटा और राहुल अपने दोस्त बिल्ला, गौरव और बट्टïू के साथ पहुंच गया। दोनों ने ही बच्चों को अलग-अलग कर दिया। इसी बीच किसी बात को लेकर बचाव में लड़कों में विवाद हो गया। दोनों ही पक्षों में मारपीट शुरु हो गई। दोनों ने एक दूसरे को बाद में देख लेने की बात कही। इसके बाद किसी ने एक पत्थर फेंक दिया। जिसकेबाद दोनों ओर से पथराव हो गया। दोनों ही समुदाय के लोग आमने-सामने आ आए। इस दौरान जमकर बवाल हुआ। दो पक्षों के बीच हुए पथराव की सूचना पर सीओ तृतीय बारादरी पुलिस केसाथ मौके पर पहुंए गए। पुलिस को देखते ही पथराव करने वाले आरोपी फरार होए। पथराव में तीन से चार लोग चाटिल हुए है। जबकि एक युवक के ज्यादा चोट आई है। जिसका पुलिस ने जिला अस्पताल में उपचार कराया और उसकी तरफ से आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। शांति व्यावस्था बनाए रखने के लिए मौके पर फोर्स तैनात कर दी गई है।
पनबडिय़ा केछोटे बवाल ले लेते हैं बड़ा रूप
शहर के अतिसंवेदनशील क्षेत्रों की लिस्ट में बारादरी के पनबडिय़ा का नाम भी शामिल है। यहां के छोटे से छोटे विवाद अक्सर बड़ा रूप ले लेते हैं। यहीं वजह है कि पुलिस भी यहां केछोटे से छोटे विवाद को गंभीरता से लेती है। बता दें कि वर्ष 2012 के दंगे में यहां पर तत्कालीन जिलाधिकारी अभिषेक प्रकाश पर उपद्रवियों ने हमला कर दिया था। हमला इतना जबरदस्त था कि जिलाधिकारी के साथ मौजूद दरोगा आशाराम उन्हें छोड़कर फरार हो गए थे। इस दौरान जिलाधिकारी का एक पैर नाले में जाने से वे गिर गए थे।
गुमराह करने में माहिर दरोगा
इस पूरे मामले में एक दरोगा से सुबह फोन पर घटना की जानकारी लेने के लिए कॉल की। फोन पर दरोगा ने बताया कि उनके चाचा की मौत हो गई थी। वह नहीं गए थे। वह सुबह ही वापस आए हैं। उन्हें बवाल के बारे में कोई जानकारी नहीं है। बता दें कि इससे पहले भी एक घटना की जानकारी के लिए कुछ समय पहले उन्हें फोन किया था। उस समय भी उन्होंने अपने चाचा की मौत होने की बात कहकर घटना की जानकारी नहीं दी थी। बताया जा रहा है कि दरोगा साहब घटनाओं को छुपाने के लिए अधिकारियों तक को गुमराह कर देते हैं।
मुकदमे के लिए पैरवी करवा रहा दूसरा पक्ष
बवाल और पथराव के बाद राहुल अपने साथियों के साथ मौके से फरार हो गया था। जबकि फैज चोट लगने की वजह से पुलिस को मौके पर ही मिल गया था। यही वजह है कि पुलिस ने घायल की तरफ से मुकदमा दर्ज किया है। मुकदमे की जानकारी होते ही अब राहुल पक्ष भी एफआईआर दर्ज कराने के लिए लगातार पैरवी करवा रहा है। लेकिन पुलिस पहले राहुल को थाने लाने की बात कर रही है।

देर रात बच्चों केविवाद में बड़े-बड़ों केबीच में झगड़ा हो गया था। इस मामले में बारादरी थाने में मुकदमा दर्ज है। घायल की मरहम पट्टी कराई जा चुकी है। आरोपियों को तलाश किया जा रहा है। जल्द ही उन्हे गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा।
रोहित सिंह सजवाण, एसएसपी